वर्ष २०१० मे हर माह एक नया हिंदी चिट्ठा किसी नए व्यक्ति से भी शुरू करवाने का संकल्प लें और हिंदी चिट्ठों की संख्या बढ़ाने और विविधता प्रदान करने में योगदान करें।
- यही हिंदी चिट्ठाजगत और हिन्दी की सच्ची सेवा है।-
नास्तिकों की भाषा : काव्य शृंखला
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*हिंदुस्तान के सबसे बड़े और महानतम नास्तिक अमर शहीद भगत सिंह को समर्पित
हैं ये कविताएं। भगत सिंह जो हमें हर समय मनुष्य की अपराजेय कर्मशीलता की याद
दिलात...
कविता--बच्चे नही जानते
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बच्चे नही जानते
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दबे पाँव आना किसे कहते है
ये जानती है ---- बिल्ली
चौकन्नी - बिना आवाज किए
आपके पास आकर बैठ जाती है-- बिल्ल...
भारत के राजस्थान प्रान्त में अवस्थित बामनवास नामक ग्राम में रहने वाले आदिवासी किसान परिवार में जन्मा। पिता को केवल अक्षर ज्ञान था और मा एकदम अनपढ। लेकिन इन दोनों ने मुझे शिक्षा दिलाने की ठानी। प्रारम्भिक शिक्षा ग्रामीण परिवेश मे फिर उच्च शिक्षा जयपुर में प्राप्त की। राजस्थान विश्व् विधालय से मैंने एम.ए. राजनीति विज्ञान में किया। बैंक में क्लर्क की नौकरी के बाद राजस्थान पुलिस सेवा में भर्ती होकर वर्ष 1993 की वरिष्ठता के साथ आई. पी. एस. में पदोन्ंती के माध्यम से पठन-लेखन रुचि। पुलिस और लेखन कर्म में बेहतरीन सामन्जस्य बनाये रखने का प्रयास करता रहा हू । समय प्रबन्धन के साथ प्रकृति मानवेत्तर प्राणी जगत और आम आदमी के हर्ष व विषाद के सौन्दर्य प्रेरणास्पद शोध के साथ उनके विभिन्न पक्षों की अभिव्यक्ति कविता व गध दोनो में करते रहने का प्रयास करता रहा हू । जिन्हें समाज के हाशिये से भी नीचे धकेलते रहने के जान-अनजाने प्रयास किये जाते रहे हैं। उन आदिवासीजन से जुडे मुद्दों को प्राथमिकता देते रहना सुख देता है। पाठकों एवं अन्य साहित्यिक मित्रों ने यथोचित साथ दिया है। नितांत एकांत में मैं ‘मैं’ हू इसलिए ‘मैं’ के अतिरिक्त मैं अन्य कुछ भी नहीं और ‘मैं’ होने का मुझे गर्व है। लेकिन ‘मैं’ के सत्य की खोज में इस ‘मैं’ एवं दृष्यादृष्य सृष्टि के विस्तार में स्वयं को यायावर सा अनुभव करता रहा हू।
2 टिप्पणियां:
आपके और आपके परिवार वालों के लिए भी नववर्ष मंगलमय हो !!
वर्ष २०१० मे हर माह एक नया हिंदी चिट्ठा किसी नए व्यक्ति से भी शुरू करवाने का संकल्प लें और हिंदी चिट्ठों की संख्या बढ़ाने और विविधता प्रदान करने में योगदान करें।
- यही हिंदी चिट्ठाजगत और हिन्दी की सच्ची सेवा है।-
नववर्ष की बहुत बधाई एवं अनेक शुभकामनाएँ!
समीर लाल
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