भारतीय परिप्रेक्ष्य में आदिवासी संदर्भ ग्रंथ के प्रोजेक्ट पर में काम कर रहा हूं। विडम्बना यह है कि अभी तक आदिवासियों के कुल समुदायों की वास्तविक संख्या से हम वाकिफ नहीं हैं। संविधान की अनुसूची में केवल अनुसूचीबद्ध आदिवासी समुदाय ही शामिल हैं। यह सूची भी राज्य@जिला@तालुकावार है इसलिए एकाधिक यूनिटों में रहने वाले आदिवासी समुदायों की गणना एक से अधिक बार हो जाती है। इसी को देखते हुए संविधान में सूचीबद्ध आदिवासियों की संख्या 645 बताई गई है जबकि समुदायवार गणना करने पर यह संख्या 583 होती है। इनके अलावा अनुसूचीबद्धविहीन समुदायों की संख्या काफी है जिनमें डि-नोटिफाईड (अपरिगणित), नोमेडिक एवं सेमी-नोमेडिक समुदाय भी हैं जो नृतत्व विज्ञान की दृष्टि से आदिवासी श्रेणी में आते हैं। चारों श्रेणी के कुल मिलाकर 1051 आदिवासी समुदाय होते हैं।
उक्त सभी आदिवासी समुदाय में से प्रत्येक पर दो से तीन पृष्ठों की परिचयात्मक सामग्री संकलित की जानी है ताकि दो या तीन खण्डों में आदिवासी संदर्भ ग्रन्थ को आकार दिया जा सके। जो साथ ही आदिवासी विषयों में रूचि रखते है उनसे आग्रह है कि जिनके पास जो सामग्री उपलब्ध है या एकत्रित करने की स्थिति में है वे कृपया ऐसी सामग्री निम्न ईमेल पता पर भेजकर सहयोग करें। उल्लेखनीय है कि जो सामग्री जिन मित्रों द्वारा भेजी जायेगी वह उन्हीं के नाम से सम्पादित की जायेगी।
भवदीय
हरिराम मीणा
31, शिवशक्ति नगर,
किंग्स रोड़, अजमेर हाई-वे,
जयपुर-302019
दूरभाष- 94141-24101
ईमेल - hrmbms@yahoo.co.in


3 टिप्पणियाँ:
आपका कार्य सराहनीय है.
app ne jo pahal ki hai main iske liye aap ka aabhari hu,asha karta hu ki isi tarah aap ka margdarshan milta rahe.
thanks
आपके इस नेक एवम दूरगामी परिणामो से ओतप्रोत कार्य के लिए साधुवाद । आपके लिए यही कहूंगा -
'' आदिवासी के दर्द से, सिहर उठे अकुलाय ।
काव्य जगत मे वही तो , हरिराम कहलाय ।।
- विजय सिंह मीणा , उप निदेशक (राजभाषा), नई दिल्ली.
मोबाईल 09968814674
कृपया मेरी रचनाए पढने के लिए क्लिक करे www.vjaysinghmeenavijay.blogspot.com
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